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अजमेर शरीफ में हवा में तैरते हुए जादुई पत्थर का रहस्य

अजमेर शरीफ में हवा में तैरते हुए जादुई पत्थर का रहस्य

अजमेर शरीफ में हवा में तैरते हुए जादुई पत्थर का रहस्य

इस दुनिया में जो कुछ भी घटित होता है उसकी वजह है अलौकिक शक्तियां. किसी जगह उसके शक्ति को भगवान कहा गया है तो किसी जगह उन दिव्य शक्ति को अल्लाह कहा गया है. इसी दिव्य शक्ति के कई चमत्कार आज भी धरती पर देखे जा सकते हैं. इंसान अगर उनका पता लगा पाया तो विज्ञान कहलाता है और अगर नहीं तो वह रहस्य मात्र बनकर रह जाते हैं.
राजस्थान के अजमेर शहर में अजमेर शरीफ दरगाह है. यह दरगाह, ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की मजार है और भारत की सबसे प्रसिद्ध दरगाहों में इसका विशेष स्थान है. अजमेर शरीफ दरगाह में मुस्लिम भाइयों का ही नहीं बल्कि हर धर्म के लोगों की आस्था है. दरगाह शरीफ में नेताओं से लेकर बॉलीवुड यहां तक की कई विदेशी हस्तियां भी चादर चढ़ाने आतीं हैं.

दरगाह के अंदर जहालरा नामक पानी का एक मुख्य और पवित्र स्त्रोत है, इसके पवित्र पानी का उपयोग दरगाह के कामों में किया जाता है. ख्वाजा मोइनुद्दीन की दरगाह में सबसे पहले आने वाला शख्स मोहम्मद बिन तुगलक था जो चौदहवीं सदी में यहां सबसे पहले आया था

रहस्य तैरते पत्थर का-

ख्वाजा की दरगाह के बाहर कुछ दूरी पर कुदरत का वो रहस्य दिखता है जो आज तक विज्ञान के लिए हैरानी का विषय है. दरगाह के बाहर एक बड़ा पत्थर बिना किसी जोड़ या सपोर्ट के जमीन से कुछ इंच की ऊंचाई पर हवा में तैर रहा है. वैज्ञानिकों की टीम ने कई बार यहां रिसर्च की पर कोई तर्क नहीं दे पाए.

ख्वाजा से जुड़ा है रहस्य-

इस पत्थर के रहस्य को लेकर भक्तों में कई कथाएं व्याप्त हैं उन्हीं में से एक प्रमुख कथा के अनुसार यह बड़ा पत्थर एक आदमी की ओर लुढ़क रहा था, अपनी मौत से घबराए उस आदमी ने ख्वाजा को सच्चे मन से याद किया और उनके आदेश से वो पत्थर जस का तस वहीं रुक गया. कहते हैं जिस समय ख्वाजा ने आदेश दिया उस वक़्त वो पत्थर हवा में आगे बढ़ रहा था और वहीं रुक गया, आज भी उसी अवस्था में है.

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