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दुनिया की सबसे खतरनाक सेना जो दुश्मनों को न भूलती है न जिंदा छोड़ती है

दुनिया की सबसे खतरनाक सेना जो दुश्मनों को न भूलती है न जिंदा छोड़ती है

दुनिया की सबसे खतरनाक सेना जो दुश्मनों को न भूलती है न जिंदा छोड़ती है


चारों तरफ से दुश्मनों से घिरा है इजराइल, एक ऐसा देश जो द्वितीय विश्व युद्ध के विनाश के बाद बना. इजराइल में यहूदी रहते हैं और इस देश की जनसंख्या है केवल 85 से 90 लाख. इजराइल को उसके दुश्मन देश चारों तरफ से घेरे हुए हैं, कहने का अर्थ है पड़ोसी देश ही इजराइल के सबसे बड़े शत्रु हैं. वाबजूद इसके ये देश रुतबे के साथ उन सभी के बीच आराम से रहता है. इजराइल की इस सफल युद्ध नीति में उनके खूफिया विभाग मोसाद(mossad) और मोसाद सैनिकों का बहुत बड़ा योगदान है. कहते हैं जिसने भी इजराइल की ओर आंख उठाकर भी देखा या दुनिया के किसी भी कोने में बैठे किसी भी इजराइली नागरिक को नुकसान पहुंचाया गया तो उसकी मौत तय है. मोसाद बड़े गर्व के साथ कहते हम न तो दुश्मन को छोड़ते हैं न ही भूलते हैं ये मोसाद सैनिक बदला लेने के लिए हैवानियत की हद से अद्भुत चालाकी तक सबकुछ बड़े परफेक्शन के साथ करते हैं. आपने जासूसी फिल्मों में जो कारनामे देखे होंगे वो सब ये असल जिंदगी में करते हैं.
इजराइल को खास एक बात और बनाती है, इस देश का हर नागरिक सैनिक है. एक तय उम्र के बाद इजराइल के प्रत्येक नागरिक को फौजी ट्रेनिंग लेनी होती है और ताकतवर बनना पड़ता है. ताकि युद्ध की परिस्थिति में सब मिलकर दुश्मन का सामना कर सकें.
इजराइली मोसाद के बारे में कई किस्से प्रसिद्ध हैं जिनमें उन्होंने 20 से 30 साल बाद भी अपने शत्रु का पीछा किया और उसे मारा. इनसे जिसने भी दुश्मनी की वो एक बात समझ जाता है कि चाहे कोई संगठन हो या फिर एक आदमी ये किसी को नहीं छोड़ते.
मोसाद फौजियों को इसके किए जबरदस्त ट्रेनिंग दी जाती है. ट्रेनिंग ऐसी जिसमें आप जल, थल या वायु तीनों में काम करने योग्य रहो. ट्रेनिंग जिसमें खराब से खराब परिस्थितियां सामने हों फिर भी मिशन पूरा कर के ही दम लो.
इसीलिए इजराइल आज भी दुनिया का सबसे सुरक्षित देश माना जाता है. दुश्मन की हिम्मत नहीं होती यहां नजर उठाकर देखने की भी.
इजराइल भारत को अपना बेहतरीन दोस्त मानता है वजह है द्वितीय विश्व युद्ध के ओईडित ये लोग जहां भी दुनिया मे रहने गए बाकी सभी देशों में इनका तिरस्कार हुआ सिवाय एक भारत के जहां इजराइलियों को सम्मान मिला. यह बात इजराइली संविधान में भी लिखी है.

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